पर्व है पुरुषार्थ का,
दीप के दिव्यार्थ का,
देहरी पर दीप एक जलता रहे,
अंधकार से युद्ध यह चलता रहे,
हारेगी हर बार अंधियारे की घोर-कालिमा,
जीतेगी जगमग उजियारे की स्वर्ण-लालिमा,
दीप ही ज्योति का प्रथम तीर्थ है,
कायम रहे इसका अर्थ, वरना व्यर्थ है,
आशीषों की मधुर छांव इसे दे दीजिए,
प्रार्थना-शुभकामना हमारी ले लीजिए!!
झिलमिल रोशनी में निवेदित अविरल शुभकामना
आस्था के आलोक में आदरयुक्त मंगल भावना!!!
*सुख, स्वास्थ्य, सम्मान, शान्ति एवं समृध्दि की मंगलकामनाओं के साथ मेरे एवं मेरे परिवार की तरफ से आप एवं आप के परिवार को दीपावली की हार्दिक शुभकामनाएं..!杖杖*
Good Morning & सादर प्रणाम
Regards
Epr NArayaN Patidar
TechEduFin_EntrePreneuR